Saturday, December 16, 2017
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साहित्य सम्मेलन,"साहित्य की बात" 17-18 september 2022 साकिबा साकीबा रचना धर्मिता का जन मंच है -लीलाधर मंडलोई। यह कहा श्री लीलाधर...
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सूर के भ्रमरगीत में वियोग-रस आलेख: अनिता मण्डा अनीता मण्डा डॉ. नगेंद्र का कथन है, “भक्ति के साथ श्रृंगार को जोड़कर उसके संयो...
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गीत अपनी लय और अर्थ के साथ जब हमारे जीवन के कथ्य को परिभाषित करता है तो उसके सृजन की सार्थकता प्रमाणित होती है |मनोज जैन मधुर आज ऐसे ही ...
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राजस्थान की पृष्टभूमि पर दो बिनब्याही माओं की कहानी ,जिसे अपनी सुगड शब्द शैली में लिखा है सुश्री वंदना देव शुक्ल ने |बिन ब्याही माँ होन...
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◻ उसे दूसरी दुनिया में भेज दिया गया है..। --------------------------------------- 📝 संध्या कुलकर्णी _____________ पी ...
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एक ज़माना था, जब कवि खुद संपादक होते थे, और ख़ुद ही प्रकाशक होते थे, |तब लेखकों में संपादक का और प्रकाशक का किरदार भी गुंथा होता था, उस ज़...
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आज वाटसअप के "साहित्य की बात समूह"मुख्य एडमिन श्री ब्रज श्रीवास्तव से , सुरेन्द्र रघुवंशी जी की कविताये ली गई| जिनकी विशद चर...
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पड़ताल "तुम्हारे जाने के बाद " कविता संग्रह ,लेखक मधु सक्सेना अनुभूतियों का संयोजन मधु सक्सेना जी का काव्य-संग्रह ...
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